Dr. Rakhi Gupta

MI Heart & Women's Health Care Clinic and Diagnostic Centre

सावन की हठ

सावन की हठ

नीम बने बंदनवार,
स्वागत खड़ा गाँव,
लजाई वर्षा के हौले देहरी पर
बढ़ उठे जो मेंहदी रचे पाँव |


अविरल नीरों के प्रवाह संग
बह कर उतर आए स्वर,
बूँद- बूँद की तृष्णा लिए
अमृत तर्पित हुए अधर|
मेघों की मंजीरों पर मधुमास
के से नर्तक हो उठे पाँव|


लजाई वर्षा के हौले देहरी पर
बढ उठे जो मेंहदी रचे पाँव ||


कुँठित थे जो अब तक
गुँजित हो उठे हैं वही गीत,
विरही शब्दों की वेदना में
मुखरित हो उठी जीवन की प्रीत|
सावन की हठ से डोले
बंजर स्वप्नों के दाँव|


लजाई वर्षा के हौले देहरी पर
बढ उठे जो मेंहदी रचे पाँव ||


                    - Dr Rakhi Gupta

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